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Knowing the Self - Mahamati Prannath in Sindhi

By Ranjanaoli

 

लखे भतें न्हारयम, खुदी बंजे न किएं केई ।
हे मूर मंझा कीं निकरे, जा कांधे डेखारई बेई।।१


लखें = लाखों, भते = तरहसे, न्हारयम = देखा, खुदी = अहंकार, बंजे = जाता, न = नहीं, किए = कैसे, केई = किया, हे = यह, मूर = मूल, मंझां = बीचमें, कीं = कैसे, निकरे = निकले, जा = जो, कांधे = धनीने, डेखारई = दिखाया, बेई = दूसरी ।


मैंने लाखों प्रकारसे देखा किन्तु यह अहंभाव किसी भी प्रकारसे जाता ही नहीं है । यह जड.-मूलसे कैसे निकलेगा, जब धामधनीने ही इसे द्वैत (माया) के रूपमें दिखा दिया है ।


I have tried in million ways to get rid of ego but nothing I can do. How can I get rid of this me mine or false perception of the self when supreme has shown the duality.


जे घुरां इसक, त हित पण पसां पांण।
हे पण खुदी डिठम, जडे थेयम हक पेहेचान।।२


जे = जो, घुरां = मांगती हूं, इसक = प्रेम, त = तो, हित = यहाँ, पण = भी, पसां = देखती हूँ, पांण = आपको, हे = यह, पण = भी, खुदी = अहंकार, डिठम = देखा, जडे = जब, थेयम = हुआ, हक = प्रीतम, पेहेचान = जानकारी ।


यदि मैं प्रियतम धनीका प्रेम माँगती हूँ तो उसमें भी अपना अहंभाव दिखाई देता है । जब मैंने धनीकी पहचान की, उसमें भी अहंभाव ही देखा ।

 

When I seek love from Lord then "I" exists and when I say I know Him it sounds full of ego too.


हक पेहेचान केके थेई, हित बिओ न कोई आए ।
जे कढे बारीकियूं खुदियूं, डे थो हक सांजाए ।।३


हक = प्रियतमका, पेहेचान = पहचान, केके = किसको, थेई = हुआ, हित = यहाँ, बिओ = दूसरा, न = नहीं, कोई = कोई, आए = है, जे = जो, कढे = निकाले, बारीकियूं = सूक्ष्म, खुदियूं = अपनापन, डे = देते, थो = हो, हक = धनी, सांजाए = पहचान ।


यहाँ पर परब्रह्म परमात्माकी पहचान किसको हुई है । यहाँ तो कोई दूसरा ऐसा है ही नहीं जो अहङ्कारकी सूक्ष्मताको दूर कर परमात्माकी पहचान करवा दे।


Who knows the Supreme almighty? I do not see anybody coming forward who has understood this subtle ego to and show us the Lord.


तन पांहिजा अरसमें, से तां सुतां निद्रमें।
जागेथो हिक खावंद, ही निद्रडी आं दीजे।।४


तन = शरीर, पांहिजा = अपना, अरसमें = धाममें, से = वह, तां = तो, सुतां = सोये हैं, निद्रमें = नींदमें, जागेथो = जाग्रत हैं, हिक = एक, खावंद = प्रियतम, हे = यह, निद्रडी = नींद, आं आपने, दी = दिया, जे = जिसने ।


हमारे मूल तन (पर-आत्मा) परमधाममें निद्रावस्थामें हैं । वहाँ पर मात्र धामधनी ही जागृत हैं जिन्होंने यह निद्रा दी है ।

 

And the body is found in the celestial abode Paramdham and you are sleeping there but the Lord is always awake. He has given us this sleep.


डेई रूहें के निद्रडी, डिखार्यांइंर् हे रांद।
हे केर डिसेथो रांदके, हित को आए हुकम रे कांध ।।५


डेई = देकर, रूहें = आत्माओं, के = को, निद्रडी = नींद, डिखार्यांई = दिखाया है, हे = यह, रांद = खेल, हे = यह, केर = कौन, डिसेथो = देखता है, रांदके = खेलको, हित = यहां, को = कोई, आए = है, हुकुम = आज्ञाा, रे = बिना, कांध = प्रियतम ।


उन्होंने ही ब्रह्मात्माओंको नींद देकर यह खेल दिखाया है । वास्तवमें इस खेलको कौन देख रहा है, यहाँ पर तो धामधनीके आदेशके अतिरिक्त अन्य है ही कौन ?


Giving the souls this deep slumber, he showed us this worldly drama. But who is actually the witness of all these play other than His Supreme's Will.


पांण तां सुत्य.ूं अरसमें, तरे धणी कदम।
जे रमे रमाडे रांदमें, बिओ कोए आए रे हुकम ।।६


पांण = अपना, तां = तो, सुत्यूं = सोये हैं, अरसमें = परमधाममें, तरे = नीचे, धणी = प्रियतम, कदम = चरणोंमें, जे = जो, रमें = खेले, रमाडे = खेलावे, रांदमें = खेलमें, बिओ = दूसरा, कोए = कोई, आए = है, रे = बिना, हुकुम = आज्ञााके ।


हम ब्रह्मात्माएँ तो परमधाममें धामधनीके चरण तले सोई हुईं हैं । इस खेलमें जो खेल रहा है वह धामधनीके आदेशके अतिरिक्त अन्य कौन हो सकता है ?


We celestial souls sleeping in Paramdham under our Lord's feet. This worldly drama nothing but is a will of Lord too.


धणी या रांद बिचमें, पडदोे तो वजूद।
पुठ डेई हकके ही पसो, हेजो न्हाए कीं नाबूद ।।


धणी = प्रीतम, या = और, रांद = बिचमें, पडदो = परदा, तो = आपका, वजूद = शरीर, पुठ = पीठ, डेई = देकर, हकके = धनीको, ही = यह, पसो = देखती हूँ, हेजो = यह जो, न्हाए = नहीं, कीं = कुछ, नाबूद = नाशवंत ।


इस खेलमें प्रियतम धनी और हमारे बीच नश्वर शरीर ही परदा है । इसलिए धामधनीको पीठ देकर मैं यह नश्वर जगतको देख रही हूँ, जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है ।


In this materialistic world our existence of this body consciousness is dividing us from the Supreme. We are actually turning our back to Lord and watching are taking interest in this perishable world.


हित हुकम हिकडो हकजो, उनहीं हकजो इलम ।
हुकम इलम या रांद के, पसो बेठ्यूं तरे कदम ।।८


हित = यहाँ, हुकम = आदेश, हिकडो = एक, हकजो = प्रियतमका, उनहीं = वे ही, हकजो = प्रीतमका, इलम = ज्ञाान है, हुकुम = आदेश, इलम = ज्ञाान, या = या, रांद = खेल, के = में, पसो = देखा, बैठयूं = बैठके, तरे = नीचे, कदम = चरणोंमें ।


यहाँ पर सर्वत्र एक धामधनीका ही आदेश है और उनका ही ज्ञाान है । मैं उनके चरणोंमें बैठकर इस खेलमें कार्यरत उनके आदेश और ज्ञाानको देख रही हूँ ।


Only will of the Supreme almighty exists and everything happens according to his order and all knowledge derives from Him. Sitting under His feet, I see his order and the Gyan (knowledge).


चोए इलम कुंजी अंइंर्, पट पण आयो अंइंर् ।
अकल आंजी अगरे, पसो उलटी या सई।।९


चोए = कहते हैं, इलम = ज्ञाान, कुंजी = चाबी, अंईं = आप हो, पट = परदा, पण = भी, आयो = हो, अंइंर् = आप, अकल = बुद्धि, आंजी = आपकी, अगरे = अधिक है, पसो = देखो, उलटी, या = अथवा, सई = सीधी ।


हे धनी ! आपका तारतम ज्ञाान कहता है कि कुञ्जी भी आपकी ही है और परदा भी आप ही है । देखो ! उलटी या सीधी बुद्धि भी आपकी ही अधिक है ।


O Lord, The key to the knowledge and wisdom comes from you and the veil the ignorance also from you. The thoughts in the mind which can be right as well as wrong also comes from you. Its you who is in full control of wisdom and ignorance.


हे रांद हुकम इलमजी, पाण के सुतडे डिखारे ।
खिल्लण बिच अरसजे, पांणके रांदयूं थोकारे।।१०


हे = यह, रांद = खेल, हुकम = आज्ञाा, इलमजी = ज्ञाानका, पांण = हम, के = को, सुतडे = सोये हुए में, डिखारे = दिखाया, खिल्लण = हँसानेको, बिच = बीचमें, अरसजे = धामके, पांणके = हमको, रांदयूं = खेल, थो = है, कारे = करते ।


आपने ही हमें अपने आदेश एवं ज्ञाानसे यह खेल स्वप्नमें दिखाया है । परमधाममें हम पर हँसी करनेके लिए ही धामधनी हमें यह खेल खेला रहे हैं ।


It was Lord's command and wisdom to bring us in this dream world. To make fun of us, Lord has created this whole game.


हित बेयो कोई न कितइंर्, सभ डिसे हुकम इलम ।
जे उडे नाबूद हुकमें, त पसो बेठ्यूं तरे कदम।।११


हित = यहाँ, बेओ = दूसरा, कोए = कोई, न = नहीं, सभ = सम्पूर्ण, डिसे = दिखता है, हुकुम = आदेश, इलम = ज्ञाान, जे = जो, उडे = मिट जाता है, नाबूद = नाशवंत, हुकुमें = आज्ञाासे, त = तो, पसो = देखूं, बेठ्यू = बैठकर, तरे = नीचे, कदम = चरणोंमें ।


यहाँ पर अन्य कोई कहीं नहीं है. सर्वत्र धामधनीका आदेश और ज्ञाान ही दिखाई देते हैं. आपके आदेशसे जब यह नश्वर जगत (तन) उड. जाएगा तब हम आपके चरणोंमें ही बैठी हुई पाएँगी ।


Only Lord's will exists and nothing else. When we lose the body consciousness we will find ourselves sitting under his feet.


धणी द्वार डिंनो असां हथमें, बिओ इलम डिनाऊं जांण ।
त कीं सहूं आडो पट, को न उपट्यू पांण ।।१२


धणी = प्रियतमनें, द्वार = दरवाजा, डिंनो = दिया, असां = हमारे, हथमें = अधिकारमें, बिओ = दूसरे, इलम = ज्ञाानसे, डिनाऊं = दिया, जांण = जानकारी, त = तो, कीं = क्यों, सहूं = सहन करूं, आडो = बीचमें, पट = परदा, को = क्यों, न = नहीं, उपट्यूं = खोलुं, पांण = स्वयं ।


हे धनी ! आपने परमधामका द्वार भी हमारे हाथोंमें सौंप दिया है और अपनी पहचानके लिए तारतम ज्ञाान भी दिया । अब मैं आप और मेरे बीच इस परदे (तन) को कैसे सहन करूँ ? इसको स्वयं क्यों न खोल दूँ ?


Oh my Lord, you have opened the doors of paramdham to us and also have introduced yourself to us through tartam wisdom. Now how can I bear this body the veil between us. Why should I not take it off?


जे रे हुकम पट खोलियां, त द्रजां खुदीजे गुने ।
नतां कुंजी डिंनाऊं हथ आसिक, सा मासूक बिछोडो कीं सहे ।।१३


जे = जो, रे = बिना, हुकुम = आज्ञाा, पट = परदा, खोलियां = खोलूं, त = तो, द्रजां = डरती हूं, खुदीजे = अहांकारके, गुने = दोषसे, नतां = नहीं तो, कुंजी = चाबी, डिंनाऊं = दिया, हथ = हाथ, आसिक = प्रेमीको, सा = वह, मासूक = प्रियतम, बिछोडो = जुदाई, कीं = कैसे, सहे = सहन करें ।


यदि मैं आपके आदेशके बिना ही परदा खोल दूँ तो अपने अहंभावके दोषसे डरती हूँ, अन्यथा आपने इस अनुरागिणीके हाथ कुञ्जी दे ही दी है तो वह अपने प्रियतमका वियोग क्यों सहन करे ?


I am terrified to take off this veil without Lord's permission as it will bring ego but you have given me the key to open the door of Paramdham then why should I bear the pain of separation?


जे होयम जरा इसक, त न पसां खुदी हुकम।
पण हिक न्हाएम इसक, बिओ पसां आडो हुकम इलम ।।१४


जे = जो, होयम = होय, जरा = थोडासा, इसक = प्रेम, त = तो, न = नहीं, पसां = देखती, खुदी = अहंकार, हुकम = आज्ञाा, पण = परन्तु, हिक = एक, न्हाएम = नहीं है, इसक = प्रेम, बिओ = दूसरा, पसां = देखती हूँ, आडो = बीच, हुकम = आदेश, इलम = ज्ञाानको ।


यदि मुझमें लेशमात्र (थोड.ा-सा) भी प्रेम होता तो मैं आपके आदेशकी ओर क्यों देखती ? किन्तु मुझमें एक प्रेम ही नहीं है । इसलिए मैं ज्ञाान और आदेशको दूसरे व्यवधानके रूपमें देखती हूँ ।


If I have a trace of love for the you, how could I wait for Your command? I am devoid of the love that is why I seek knowledge and command as a distraction.


न तां जे दर उपटियां, पसण धणी रेहेमान।
कीं न्हारियां बाट हुकमजी, धणी डिंनी कुंजी पेहेचान ।।१५


न = नहीं, तां = तो, जे = जो, दर = दरवाजा, उपटियां = खोलकर, पसण = देखा, धणी = प्रीतम, रेेहेमान = दयालु हैं, कीं = क्यों, न्हारियां = देखूं, बाट = रास्ता, हुुकमजी = आज्ञााकी, धणी = प्रियतमने, डिंनी = दिया, कुंजी = चाबी, पेहेचान = जानकारी।


अन्यथा परम कृपालु धनीके दर्शनके लिए द्वार खोल देती । जब धामधनीने मुझे तारतम ज्ञाानरूपी कुञ्जी देकर अपनी पहचान करवा दी है तो अब उनके आदेशकी राह क्यों देखूँ ?


Otherwise I would have opened the door of ultimate merciful Lord and not wait for his command after he has given the key to know Him.


सुकेमें डिंया कीं डुबियूं, जे अचिम जरा इसक ।
त हुकुम खुदी न्हाए गुणो, पट दम न रखे बेसक ।।१६


सुकेमें = बिना पानीके, डियां = देऊं, कीं = कैसे, डुबियूं = डुबकी, जे = जो, अचिम = आवे, जरा = थोडा, इसक = प्रेम, त = तो, हुकम = आदेश, खुदी = अभिमान, न्हाए = नहीं, गुणो = अवगुण, पट = परदा, दम = क्षण, न रखे = नहीं रखे, बेसक = निश्चय करके।


यदि लेश मात्र भी प्रेम होता तो मैं शुष्क (सूखेमें) डूबकियाँ कैसे लगाती। तब आदेश और अहंभावका कोई दोष नहीं रह जाता । प्रेम निश्चय ही क्षण मात्रके लिए भी परदा रहने नहीं देता है ।


How could I indulge in the pleasure if I had slightest of Love for the Lord? There would be no pride or ego to blame. The veil of ignorance and all vikaar evils are immediately taken off.


इसक मंगां त गुणो, खुदी पण गुनेगार।
हुकम इलमजे न्हारियां, त आंऊं बंधिस बिंनी पार ।।१


इसक = प्रेम, मंगां = मांगती हूँ, त = तो, गुणो = गुनाह, खुदी = अहंभाव, पण = भी, गुनेगार = दोषित, हुकम = आज्ञाा, इलम = ज्ञाान, जे = जो, न्हारियां = देखती हूँ, त = तो, आंऊं = मैं, बंधिस = बँध गई हूँ, बिंनी = दोनों, पार = तरफसे ।


प्रेम माँगती हूँ तो भी दोष लगता है. अहंभाव भी स्वयं दोष स्वरूप है. यदि मैं आदेश और ज्ञाानकी ओर देखती हूँ तो दोनों ओरसे बँध गई हूँ ।


When I seek love it is like a crime even the pride (ego) is blemish to the soul and when I seek knowledge and Lord's command I am tied from both end.


जे सऊर करे न्हारियां, त खुदी मंगण तरे हुकम ।
त दर उपटे पांहिजो, गडजां को न खसम ।।१८


जे = जो, सऊर = विचार, करे = करके, न्हारियां = देखा, त = तो, खुदी = मैं पना, मंगण = मांगना, तरे = नीचे, हुकुम = आज्ञाा, त = तो, दर = द्वार, उपटे = खोलके, पांहिजो = अपने, (हम), गडजां = मिलें, को = क्यों, न = नहीं, खसम = प्रीतमसे ।


जब विचार कर विवेक पूर्वक देखती हूँ तो मेरा अहंभाव तथा याचना (माँगना) दोनों ही आदेशके अधीन हैं. तो फिर द्वार खोलकर अपने प्रियतम धनीसे क्यों न मिलूँ ?


When I ponder even seeking love or knowledge is also under his divine will so why not open the door and meet him?


खुदी गुणो हुकमें, घुरां कुछां हुकम।
पट लाहियां या जे करियां, सभ हुकमें चयो इलम ।।१९


खुदी = अहंपना, गुणो = दोष, हुकमे = आज्ञाासे, घुरां = मांगना, कुछां = बोलना, पट = परदा, लाहियां = उतारना, या = अथवा, जे = जो, करियां = भी करती हूं, सभ = सभी, हुकमें = आज्ञाासे, चयो = कहा, इलम = ज्ञाान ।


मेरा अहंभावरूप दोष, याचना (माँगना) तथा बोलना भी आपके आदेशके अधीन है । फिर परदा दूर करूँ या जो भी करूँ वे सब आपके आदेशसे ही होता है । तारतम ज्ञाान हमें इस प्रकारकी समझ देता है ।


All my deeds seeking love, existence of ego and speaking all are under your will. So if I drop the veil or not is also your will. Everything happens as your will.


हित खुदी न गुणो के सिर, दर उपट या ढक ।
पस पिरी या रांद के, आखर इंर् चोए इलम हक ।।२०


हित = यहाँ, खुदी = अभिमान, न = नहीं, गुणों = दोष, के = किसके, सिर = ऊपर, दर = द्वार, उपट = खोलना, या = अथवा, ढक = बंद रखना, पस = देखो, पिरी = प्रियतम, या = अथवा, रांद = खेल, के = को, आखर = अन्तमें, ईं = इस प्रकार, चोए = कहते हैं, इलम = ज्ञाान, हक = परमात्मा ।


यहाँ पर (इस खेलमें) अहंभावका दोष भी किसीके सिर पर नहीं है । भला, द्वार खोलो या बँध रखो । अपने धनीकी ओर देखो या खेलको देखो । धामधनीका तारतम ज्ञाान अन्तिममें यही कहता है (यह सब आदेशके अधीन है) ।


One is not accountable in this worldly sport for being body conscious or soul conscious. Whether one opens the door of paramdham to the self or keeps it closed. The Lord's will is the actual player we all are under the influence of it.


सभ डिंनो दिल मोमिनजे, जो मोमिन दिल अरस ।
पस पांण पांहिजे दिलमें, दिल मोमिन अरस परस ।।२१


सभ = सम्पूर्ण, डिंनो = दिया, दिल = दिल, मोमिनजे = ब्रह्मसृष्टियोंके, जो = जो, अरस = परमधाम, पस = देखो, पांण = आप, पांहिजे = आपके, दिलमें = दिलमें, मोमिन = ब्रह्मसृष्टि, अरस परस = एक आपसमें।


जिन ब्रह्मात्माओंका हृदय परमधाम है उनके हृदयमें धामधनीने सब कुछ दे दिया है । स्वयं झाँक कर अपने हृदयमें देखें तो ज्ञाात होगा कि ब्रह्मात्माओंका हृदय व परमधाम दोनों परस्पर एक ही है ।


Those celestial souls heart is set to Paramdham, Lord has given them everything. Look within the self and you will find Paramdham and your heart is one and the same.


अरस दिल मोमिनजो, जे पसे अरस मोमन।
चाहिए कोठियां हक अरसमें, त तो पेरो न्हाए ए तन ।।२२


अरस = धाम, दिल = दिल, मोमिन = आत्मा, जो = का, जे = जो, पसे = देखें, अरस = परमधाम, मोमन = ब्रह्मसृष्टि, चाहिए = इच्छा करते, कोठियां = बुलाना, हक = प्रीतम, अरसमें = धाममें, त = तब, तो = तो, पेरो = पहला, न्हाए = नहीं है, ए = यह, तन = शरीर ।


ब्रह्मात्माएँ परमधामको देखना चाहें तो उनका हृदय ही परमधाम है । यदि धामधनी उन्हें परमधाम बुलाना चाहें तो उनका नश्वर तन मानो है ही नहीं।


The heart of the celestial souls is the Paramdham. If you want a room in Paramdham forget your body.


महामत चोए हे मोमिनो, धणिएं पूरी केई खिल्ल ।
पिरी पसो या रांद के, हक बेठो अरस तो दिल ।।२३


महामति = महामति, चोए = कहते हैं, हे = हे, मोमिनो = परमधामकी आत्माओं, धणिएं = प्रियतमने, पुरी = पूर्ण, केई ृ= किया, खिल्ल = हँसी, पिरी = प्रीतम, पसो = देखो, या = अथवा, रांद = खेल, के = को, हक = धनी, बेठो = बैठे हैं, अरस = परमधाम, तो = आपके, दिल = दिलमें ।


महामति कहते हैं, हे ब्रह्मात्माओ ! धामधनीने हमारी पूरी हँसी की है । तुम चाहे खेलको देखो या अपने प्रियतमको देखो, वे तो तुम्हारे हृदयरूपी धाममें विराजमान हैं ।
प्रकरण ११ चौपाई ४९३


O my dear celestial souls, Lord has made mockery of us whether you look at the world or the beloved Lord, he is always there in your heart.